गर थमाई हो अंगुली,
दिया हो वक़्त,
बचपन तो आज भी खिलखिलाता है,
मदमस्त......, मदमस्त।
अतृप्त मन कर जतन,
बढ़ रहा कदम कदम,
शेष की आस में,
अवशेष के साथ में,
तृप्ति की राह में,
अतृप्त से ये कदम,
मै चल रहा सहम सहम,
मै चल रहा सहम सहम।।
हार कर बार बार
हार के हार को
कर रहा मैं नमन।
जीत की राह में
पुष्प ये हार का
कर रहा मैं वरण।