Wednesday, 29 January 2020

बचपन

गर थमाई हो अंगुली,
दिया हो वक़्त,
बचपन तो आज भी खिलखिलाता है,
मदमस्त......, मदमस्त।

ख़्वाब

टूट गया जो ख़्वाब, जोड़ सकता नहीं मै,
नए ख्वाबों की ताबीर रोक सकता नहीं मै।

उम्मीद की डोर पर चला जा रहा हूं,
इस डोर का छोर पर देख सकता नहीं मै।।

चाह

ज़िंदगी तुझे जीना चाहता हूं,
गाना और गुनगुनाना चाहता हूं।

ख़्वाब बचपन वाले फिर पालना चाहता हूं,
रोज़ कुछ नया बन जाना चाहता हूं।

बचा है इंसान मुझमें अब भी,
खुद को यकी दिलाना चाहता हूं।।

Sunday, 22 September 2019

तृप्ति

अतृप्त मन कर जतन,
बढ़ रहा कदम कदम,

शेष की आस में,
अवशेष के साथ में,

तृप्ति की राह में,
अतृप्त से ये कदम,

मै चल रहा सहम सहम,
मै चल रहा सहम सहम।।

Sunday, 8 September 2019

ज़िन्दगी

ना कल में जियो,
ना कल को जियो,
इस पल है ज़िन्दगी,
जी भर के जियो।।

Thursday, 22 August 2019

हार का पुष्प

हार कर बार बार
हार के हार को
कर रहा मैं नमन।

जीत की राह में
पुष्प ये हार का
कर रहा मैं वरण।

Thursday, 6 June 2019

ज़िन्दगी

ये छोटी छोटी हसरते,

ये छोटे छोटे ग़ुरूर,

ये सुरूर है ज़िंदगी का जनाब,

कभी मजबूर, कभी मगरूर।