ये छोटी छोटी हसरते,
ये छोटे छोटे ग़ुरूर,
ये सुरूर है ज़िंदगी का जनाब,
कभी मजबूर, कभी मगरूर।
वीर हो विराट हो,
अग्नि का ताप हो,
वायु से प्रचंड तुम,
राष्ट्र का नाद हो,
कृतज्ञ मन करे नमन,
हृदय पुष्प स्वीकार हो।
🌹अभिनंदन🌹🙏
God grant me the serenity
To accept the things I cannot change,
The courage to change the things I can;
And the wisdom to know the difference.
Dr Reinhold Niebuhr
अभी अस्त हुआ नही,
अभी तृप्त हुआ नही।।
जब दिखा अनंत अंत,
हुआ शुरू वही कही।।
तुम रुके रुके से हो,
मैं अभी चला नही।।
सांझ कुछ ढली सी है,
मैं अभी ढला नही।।
ज्ञान से ही ज्ञान को,
ढूंढ़ता चला यू ही कहीं।।
तुम रुके रुके से हो,
मैं अभी चला नही।।
खत्म सा सफर हुआ,
समझ लिया पड़ाव ही।।
आशाओं के मोड़ पर,
शुरू नया सफर यू ही।।
तुम रुके रुके से हो,
मैं अभी चला नही।।